चूहों की सभा
एक बहुत बड़े मकान में
सैकड़ों चूहे रहते थे
उन सब की जिंदगी हंसते खेलते
फुदकते बड़े आनंद से गुज़र रही थी
परंतु एक दिन
अचानक घर का मालिक
एक बिल्ली उठा लाया
बिल्ली क्या अाई
चूहों की तो जैसे शामत आ गई हो
बिल्ली बहुत डरावनी थी
उसे ढेर सारा दूध पीने को मिलता था
परंतु फिर भी उसकी संतुष्टि
नहीं हो रही थी
वह घंटों लेटी रहती
तीन चार चूहे तो वह
रोज़ पकड़ कर खा जाती
समस्या दिन ब दिन
गंभीर होती जा रही थी
थक हार कर चूहों ने सभा बुलाई
जिसमें हर छोटा बड़ा चूहा शामिल हुआ
एक बोला
हमें इस मुसीबत से छुटकारा पाना ही होगा
भाइयों , अपने अपने सुझाव दो
कि बिल्ली को कैसे मारा जाए
या कैसे उससे पीछा छुड़ाया जाए
बहुत समय तक खुसर फुसर होती रही
काफी देर बाद
एक नन्हा चूहा आगे बढ़ा और बोला
क्यों न बिल्ली के गले में घंटी बांध दें ?
जहां कहीं वह जाएगी
घंटी की आवाज़ आ जाएगी
और हम अपने अपने बिल में छुप जाएंगे
तो बिल्ली हमारा कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएगी
चारों ओर तालियां बजने लगी
वाह वाह , यह तो सचमुच बड़ा अदभुत उपाय था
अरे , इस नन्हे का विचार तो सचमुच कमाल का है
लगता है अब हमारे फिर सुहावने दिन लौटने वाले हैं
अब हमें किसी तरह का भय खाने की जरूरत नहीं
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