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by
Siia
ना मैंने कुछ कहा है
ना उसने कुछ सुना है
ये ख्वाब तो अकेले
मेरी आंखों ने बुना है
तड़प है सिर्फ मेरी
गु़रूर बस मेरा है
नहीं वो इसमें शामिल
कुसूर भी मेरा है
तो क्या हुआ जो हाल वो मेरा नहीं समझता
मेरा प्यार...एक तरफा
मेरा प्यार...एक तरफा
ये बहार...एक तरफा
ये बहार...एक तरफा
कभी दिन है धुंधले धुंधले
कभी धूप जैसी रातें
कोई सरफिरा है समझे
ये सरफिरी सी बातें
कहीं तोहफे और दुआंऐं
मैं फिज़ुल भेजती हूं
उसकी तरफ से खुदको
मैं फूल भेजती हूं
अजीब सा नशा है
ये नशा नहीं उतरता
मेरा प्यार...एक तरफा
मेरा प्यार...एक तरफा
ये बहार...एक तरफा
ये बहार...एक तरफा
अभी कल ही तो मिली थी
ख्वाबों के मोड़ पर वो
भीगा था रात भर मैं
बरसी थी रात भर वो
जादु है एक ऐसा
जो मैं ही जानता हूं
उसको छुए बिना भी
उसके गले लगा हूं
अब उसके बिन ना एक पल मेरा कभी गुज़रता
मेरा प्यार...एक तरफा
मेरा प्यार...एक तरफा
ये बहार...एक तरफा
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